Wednesday, 19 July 2017

भारत की बदहाल शिक्षा व्यवस्था

-- बदहाल शिक्षा व्यवस्था से मेरा मतलब सरकार या किसी पर दोषारोपण नहीं है !
-- उत्तरप्रदेश में मंत्रियों , अधिकारियों , न्यायाधीशों और सरकार से वेतन पाने वाले सभी कर्मचारियों के बच्चों को परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में पढ़ना होगा अनिवार्य ।

भारत में आजकल न तो शिक्षा की स्थिति सही है और न ही शिक्षक की , वर्तमान समय में जो शिक्षक बन रहे है उन्हें विषय का सही ज्ञान ही नहीं है और वह सिर्फ अपनी कुर्सी का मजा ले रहे है कदाचित कोई शिक्षक इस बदहाल व्यवस्था के प्रति आवाज उठाता है तो उसे मुँह की खानी पड़ती है ऐसे ही एक कहानी सुल्तानपुर की है वर्ष 2015 के जुलाई माह में उत्तर प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा की बदहाल स्थिति के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक शिक्षक को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी। राज्य में शिक्षा की स्थिति में सुधार लाने के इरादे से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने वाले सुल्तानपुर के शिक्षक शिव कुमार पाठक को सरकार ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया था । अब जब कोई सुधार करने की बात करता है तो उसे या तो समाज स्वीकार नहीं करता या फिर सरकार उस पर अपना चाबुक चलाती है , बदहाल शिक्षा व्यवस्था से मेरा मतलब सरकार या किसी पर दोषारोपण का नहीं है अपितु हमी उसके जिम्मेदार है खैर इसी घटनाक्रम में एक अजब सी मोड़ आयी इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने अपने एक फैसले में यह आदेश दिया है की उत्तरप्रदेश में मंत्रियों , अधिकारियों , न्यायाधीशों और सरकार से वेतन पाने वाले सभी कर्मचारियों के बच्चों को परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में पढ़ना अनिवार्य होगा । खैर नारायण वास्तव में इस फैसले का कितना अनुपालन हुआ आप सभी जानते ही है , भारत में व्याप्त इस बदहाल व्यवस्था को बदलने के लिए हर किसी को शिक्षा के प्रति जिम्मेदार  होना चाहिए बाकि आपके सुझाव आमंत्रित है ।

प्रणव मिश्र - स्वतंत्र पत्रकार

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