पुर्तग़ाली व्यापारी भारत में आम लेकर आए थे। इसके बीजों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कठिनाई के कारण संभवतः 1700 ई. में ब्राज़ील में इसे लगाए जाने से पहले पश्चिमी गोलार्द्ध इससे लगभग अपरिचित ही था, 1740 में यह वेस्टइंडीज़ पहुंचा। कई नवाबों और राजाओं के नामों पर भी इसका नामकरण हुआ। आम का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। डी कैडल (सन् 1844) के अनुसार 'आम्र' प्रजाति (मैंजीफ़ेरा जीनस) संभवत: बर्मा, स्याम तथा मलाया में उत्पन्न हुई, परंतु भारत का आम, मैंजीफ़ेरा इंडिका, जो यहाँ, बर्मा औरपाकिस्तानमें जगह जगह स्वयं (जंगली अवस्था में) होता है, बर्मा-असम अथवा असम में ही पहले पहल उत्पन्न हुआ होगा। भारत के बाहर लोगों का ध्यान आम की ओर सर्वप्रथम संभवत: बुद्धकालीन प्रसिद्ध यात्री,ह्वेन त्सांग(632-45) ने आकर्षित किया।प्रजातियाँ उद्यान में लगाए जाने वाले आम की लगभग 1400 जातियों से हम परिचित हैं। इनके अतिरिक्त कितनी ही जंगली और बीजू किस्में भी हैं। गंगोली आदि (सन् 1955) ने210 बढ़िया कलमी जातियों का सचित्र विवरण दिया है। विभिन्न प्रकार के आमों के आकार और स्वाद में बड़ा अंतर होता है। कुछ बेर से भी छोटे तथा कुछ, जैसे -सहारनपुर का 'हाथीझूल', भार में दो, ढाई सेर तक होते हैं। कुछ अत्यंत खट्टे अथवा स्वादहीन या चेप से भरे होते हैं, परंतु कुछ अत्यंत स्वादिष्ट और मधुर होते हैं।विदेशियों द्वारा प्रशंसित 'फ्ऱायर' (सन् 1673) ने आम को आडू और खूबानी से भी रुचिकर कहा है। 'हैमिल्टन' (सन् 1727) ने गोवा के आमों को बड़े, स्वादिष्ट तथा संसार के फलों में सबसे उत्तम और उपयोगी बताया है। इस फल का नाम मैंगो, जिससे यह अंग्रेज़ी तथा स्पेनिशभाषी देशों में पहचाना जाता है। तमिल भाषा में मैन-के या मैन-गे से उत्पन्न हुआ है। पुर्तग़ालियों ने पश्चिम भारत में बसने पर मैंगा के रूप में अपनाया था। आम को अलग-अलग नाम दिए गए जैसे लंगड़ा, दशहरी, अलफॉंसो और चौंसा।भारत में आमभारत में, पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़ कर आम लगभग सभी स्थानों पर पैदा होता है। हमारे यहाँ आम की सैंकड़ों किस्में है। यह आकार और रंगों में अलग-अलग होते हैं। भारत में आम की फ़सल अति प्राचीनकाल से उगाई जाती रही है। आम को अनंत समय से भारत में उगाया जाता रहा है। विश्व के अनेक देशों में आम की अलग-अलग जाति होती है। फिर भी हिंदुस्तान का प्रसिद्ध फल आम ही है। आँकड़ों के मुताबिक इस समय भारत में प्रतिवर्ष एक करोड़ टन आम पैदा होता है जो दुनिया के कुल उत्पादन का 52 फ़ीसदी है। स्वाद, स्वास्थ्य एवं बल संवर्धन की दृष्टि से आम सभी फलों में आगे है। आम भिन्न-भिन्न जाति के होते हैं। किन्तु सभी आमों के गुण प्रायः एक से ही होते हैं।आम विक्रेता आम भारत के लोकगीतों और धार्मिक अनुष्ठानों से अनिवार्य रूप से जुड़ा है। कवी कालीदास ने इसकी प्रशंसा में गीत लिखे हैं।अलेक्ज़ॅन्डर ने इसका स्वाद चखा है और साथ ही चीनी धर्म यात्री हुएन-सांगने भी।मुग़ल बादशाह अकबर ने बिहार के दरभंगा में 1,00,000 से अधिक आम के पौधे रोपे थे, जिसे अब 'लाखी बाग़' के नाम से जाना जाता है। स्वयं बुद्ध को एक आम्रकुंज भेंट किया गया था, ताकि वह उसकी छाँव में विश्राम कर सकें।
- प्रणव मिश्र
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